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क्या संन्यास के बाद खेती कर रहे हैं महेंद्र सिंह धोनी ?

  • Shivam Dixit

  • Published:16-02-2021 20:08:22
  • खेल

महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों कहां  हैं, क्या कर रहे हैं यह सवाल हर क्रिकेटप्रेमी के दिमाग में आता होगा। धोनी जिन्होंने टीम इंडिया को दूसरी बार विश्व चैम्पियन का खिताब जिताया, टी 20  में पहला वर्ल्ड कप जिताया और आईपीएल में उनका जलवा आज भी बरकरार है। अपने शांत स्वभाव के कारण धोनी मैदान से बाहर भी काफी पसंद किये जाते हैं। वैसे वह सोशल मीडिया पर बहुत कम ही सक्रिय रहते हैं लेकिन हाल ही में धोई की कुछ फोटोज वायरल हुई हैं जिसमे वह अपने खेत में उगी हुई स्ट्रॉबेरी खाते हुए नज़र आ रहे थे।  यह फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई।   



43 एकड़ में फैला है खेत 

आपको बता दें धोनी का खेत लगभग 43 एकड़ में फैला हुआ है, अपने ऐसे कामों के कारण वह अपना ही नहीं अपने पड़ोसियों का भी फायदा करा रहे हैं। आपको बता दें इस खेत में  स्ट्रॉबेरी के अलावा, टमाटर, लौकी, मटर, अनानास, शरीफा, अमरूद, पपीता, प्याज,मटर भी लगी हुई है।  इसके अलावा चरों तरफ आम के पेड़ भी लगाए गए हैं।   


क्या किसान बन खुद खेती कर रहे हैं धोनी ? 



धोनी को क्रिकेट जगत में बेहतरीन प्लेयर के तौर पर जाना जाता है, उनके तेजतर्रार फैसले और रिस्क लेने की काबिलियत उन्हें किसी भी अन्य प्लेयर से अलहदा बनाती है। लेकिन धोनी ने जब खेती की दुनिया में कदम रखा तो उन्होंने कृषि क्षेत्र के एक्सपर्ट से राय ली। आपको बता दें रांची ज़िला मुख्यालय से लगभग 18 किलोमीटर दूर सेंबो गांव में स्थित धोनी के फार्म हाउस में खेती का ज़िम्मा एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर चुके रौशन कुमार संभाल रहे हैं।


मीडिया से बात करते हुए रौशन ने बताया, लॉकडाउन  के दौरान अपना घर बनाने में व्यस्त था तभी एक फ़ोन आया और कहा गया की आपको धोनी ने बुलाया है, मैं बिना ज्यादा सोच - विचार किए  यहाँ चला आया और तब से खेती का ज़िम्मा सम्हाल रहा हूं।   
  
ज़मीन के हर कोने को भर देना है : धोनी 

रौशन ने मुलाकात के बारे में बात करते हुए बताया कि  ''पहली मुलाकात में धोनी भैया ने यही कहा कि रौशन ज़मीन के एक-एक कोने को भर देना है। लेकिन हर कोने की अपनी ख़ासियत हो, इसका ध्यान रखना, इसके अलावा यह भी ध्यान रखना की यहां पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती होनी है। हालांकि इसमें ध्यान देने वाली बात ये है कि खेती की शुरुआत आप पूरी तरह ऑर्गेनिक खेती से नहीं कर सकते हैं।  उस तरफ धीरे-धीरे शिफ़्ट होना पड़ता है। यही वजह है कि यहां गाय पाली जा रही हैं, मुर्गियां है, मछली हैं, बत्तख पालने की योजना है. इसे समेकित खेती भी कहते हैं।  यानी यहां की उपज और अन्य सभी चीजों का यहीं इस्तेमाल हो सके।''



खेत में लगभग 70-80 मज़दूर  करते हैं काम, गायों के उपचार की व्यवस्था

धोनी के फार्म हाउस के मैनेजर कुणाल ने जानकारी दी कि  "खेत में लगभग 70-80 मज़दूर हर दिन काम करते हैं, सभी आसपास के गांवों के हैं। उन्हें मज़दूरी के अलावा यहां खेती के तौर-तरीकों को भी सिखाया जा रहा है। ताकि वह अपने ज़मीन पर इसी तरह खेती कर सकें।