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प्रदूषण से निपटने को दिल्ली सरकार ने लिए अहम फैसले, लोगों को मिली राहत

नई दिल्ली। केजरीवाल सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण से प्रदेशवासियों को राहत दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। और इसमें कहीं न कहीं काफी हद तक लाभ भी मिला है।
  • Bhupendra Singh Chauhan

  • Published:21-02-2021 13:05:06
  • देश

नई दिल्ली। केजरीवाल सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण से प्रदेशवासियों को राहत दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। और इसमें कहीं न कहीं काफी हद तक लाभ भी मिला है। इसमें केजरीवाल सरकार ने आमजन का भी काफी सहयोग मांगा, जिसमें दिल्ली वासियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। युद्ध, प्रदूषण के विरूद्ध अभियान चलाकर दिल्ली निवासियों को वाहनों के साथ अन्य तरह से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए लोगों को जागरूक किया। सरकार ने वन उत्सव का आयोजन कर पूरी दिल्ली में 31 लाख पौधे लगाए और चार नए वन क्षेत्रों को भी विकसित करने का काम शुरू किया।



यही नहीं प्रदूषण कम करने के लिए दिल्ली सरकार हमेशा से गंभीर रही है। पिछले वर्ष प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। हालांकि कोरोना काल के बीच यह काफी मुश्किल रहा है, इसके बावजूद सरकार इसके लिए प्रयासरत रही और सफलता हासिल की। दिल्ली वासियों पर कोराना के साथ प्रदूषण की दोहरी मार नहीं पड़ने दी।



दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से पिछले वर्ष अक्टूबर माह में ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान की शुरूआत की थी। सीएम की अपील पर दिल्ली निवासियों ने बढ़चढ़ कर अभियान में हिस्सेदारी की। इसमें सभी मंत्रियों और विधायकों ने पूरे अभियान तक सड़क पर उतर कर वाहन चालकों के बीच पहुंचकर जागरूकता अभियान चलाया। इसके साथ ही 2500 सिविल डिफेंस वालेंटियर नियुक्त कर उन्हें दिल्ली के उन 100 व्यस्त चौराहों पर लगाया गया, जहां वाहनों को रेड लाइट ऑन होने पर 2 मिनट या अधिक समय तक रूकना पड़ता है। इस दौरान वालेंटियर्स ने चालकों से अपनी गाड़ी बंद करने की अपील की और दिल्ली ने भी अभियान में पूरा साथ दिया।

 

सरकार की तरफ से ‘युद्ध प्रदूषण के विरूद्ध’ अभियान की शुरूआत की गई। अभियान में पूरी दिल्ली के निवासियों को शामिल किया गया। इसके तहत सड़कों पर उड़ने वाली धूल रोकने के लिए मैकेनिकल सफाई की शुरूआत की गई। अभियान चलाकर सड़कों पर हुए गड्ढों को ठीक किया गया, ताकि धूल से होने वाले प्रदूषण से निजात मिल सके। इसके अलावा प्रदूषण को रोकने के लिए PWD विभाग ने विभिन्न स्थानों पर 23 एंटी स्मॉग बन स्थापित किया।



किसानों द्वारा पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने पूसा इंस्टीट्यूट द्वारा बनाई गई बायो डीकम्पोजर घोल तकनीक का उपयोग किया और किसानों को जागरूक किया। इसके उपयोग से पराली कुछ दिनों में गल कर खाद में बदल जाती है। सरकार की तरफसे यह घोल सभी किसानों के खेत में निशुल्क छिड़काव कराया गया।



इसके साथ ही सरकार की तरफ से ग्रीन दिल्ली एप शुरू किया गया और लोगों से अपील की, कि कहीं कूड़ा जल रहा हो या कचरा जमा किया जा रहा हो, तो उसकी फोटो, वीडियो या ऑडियो एप पर अपलोड कर शिकायत कर सकते हैं। एप पर आने वाली शिकायतों को तत्काल निस्तारित किया।