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फिल्म रिव्यु : 'द गर्ल ऑन द ट्रेन' - हॉलिवुड की सुपरहिट फिल्म के साथ ये क्या किया ?

'द गर्ल ऑन द ट्रेन', पौला हॉकिन्स की किताब पर आधारित यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर देखी जा सकती है, फिल्म के लिए जो बात सबसे बुरी है वह यह है की हॉलवुड में 'The Girl on the Train' को 2016 में ही बनाया जा चुका है जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम है
  • Shivam Dixit

  • Published:27-02-2021 9:05:39
  • मनोरंजन

लखनऊ : बॉलीवुड में हॉलीवुड फिल्मों से प्रेरणा लेकर बहुत सी फिल्में बन रही हैं। ऐसी ही एक फिल्म रिलीज़ हुई है, नाम है 'द गर्ल ऑन द ट्रेन', पौला हॉकिन्स की किताब पर आधारित यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर देखी जा सकती है, फिल्म के लिए जो बात सबसे बुरी है वह यह है की हॉलवुड में 'The Girl on the Train' को 2016  में ही बनाया जा चुका है जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम  है।



थ्रिलर कैटेगरी में उस फिल्म को क्लासिक्स में शुमार किया गया है। बॉलीवुड में बनी 'द गर्ल ऑन द ट्रेन' का निर्देशन रिभु दासगुप्ता ने किया है जिसमे परिणीति चोपड़ा, अदिति राव हैदरी, कीर्ति कुल्हारी, अश्विनी तिवारी मुख्य किरदारों में दिखाई देंगे। आइए  जानते हैं कैसी है 'द गर्ल ऑन द ट्रेन' ?   




कैसी है कहानी ?  

यह कहानी शुरू होती है लंदन में रहने वाली मीरा कपूर (परिणीति चोपड़ा) से, जिसकी जिंदगी में कई उलझने हैं। पर्सनल से लेकर उसकी प्रोफेशनल लाइफ लगभग बर्बाद हो चुकी है। उसका मिसकैरेज हो चुका है, पति से तलाक भी हो चुका है। इस सब से निपटने के लिए मीरा नशे की आदि हो जाती है तो वहीँ उसका पति दूसरी शादी कर लेता है। 


इसके बाद होता है एक मर्डर जिसके बाद मीरा  की ज़िन्दगी में पहले से ज्यादा दिक्कतें आ जाती हैं। मर्डर का शक मीरा  पर जाता है जिसके बाद इसी गुत्थी को सुलझाने में यह फिल्म निकल जाती है। कहानी में कई थ्रिल मूमेंट्स हैं जिसके चलते जिसके किताब नहीं पढ़ी है या हॉलीवुड वाली फिल्म नहीं देखी है उनको फ़िल्म अच्छी लग सकती है।  

भारतीय दर्शकों से कनेक्ट नहीं होती है फिल्म     

फिल्म का जो पहला ड्राबैक है वह यह है की फिल्म लंदन के माहौल पर आधारित है तो हर वर्ग का दर्शक फिल्म से सीधा नहीं जुड़ सकेगा। डायलॉग्स में भी इंग्लिश का जमकर इस्तेमाल हुआ है जिसके चलते बहुत दर्शकों को समझने में दिक्कत होगी। कुल मिलाकर फिल्म भारतीय दर्शकों की फीलिग्ंस के साथ घुल मिल नहीं पाते हैं। 


फिल्म में इतने सारे किरदार होने के बाद भी कोई भी किरदार याद रखने लायक नहीं है। अगर अपने किताब पढ़ रखी  है या हॉलीवुड वाली फिल्म देख चुके हैं तो आप 120 मिनट की इस फिल्म को नहीं देख सकेंगे। अगर ऐसा नहीं है तो आप फिल्म में मौजूद थ्रिल्स के लिए इसे देख सकते हैं। फिल्म का क्लाइमैक्स बेहद चौकाने वाला है।          
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