BREAKING NEWS

2021 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पहले अंतरिक्ष कार्यक्रम का काउंटडाउन शुरू, कल सुबह लॉन्चिंग

2021 में इसरो के पहले अंतरिक्ष मिशन का काउंटडाउन जारी है। इस मिशन के तहत इसरो के पीएसएलवी-सी51 रॉकेट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से 28 फरवरी को लॉन्च पैड से लॉन्च किया जाएगा।
  • Bharat Samachar News Desk

  • Published:27-02-2021 16:24:34
  • देश

कोरोना महामारी के बाद 2021 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पहले अंतरिक्ष कार्यक्रम का काउंटडाउन शुरू हो गया है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस से पीएसएलवी-सी51/Amazonia-1 मिशन का काउंटडाउन आज सुबह 08:54 पर शुरू कर दिया गया। इसरो के इस मिशन को कल सुबह लॉन्च किया जाएगा। इसकी जानकारी इसरो ने अपने ट्विटर हैंडल पर दी।






इसरो का 53वां पीएसएलवी मिशन

पीएसएलवी-सी51 रॉकेट पीएसएलवी (पोलर सैटेलाइट लांच वेहिकल) का 53वां मिशन होगा। इसके जरिए ब्राजील के Amazonia-1 सैटेलाइट को लांच किया जाएगा। Amazonia-1 प्राइमरी सैटेलाइट है और इसके साथ 18 अन्य सैटेलाइट्स को भी श्रीहरिकोटा से लांच किया जाएगा। इसरो द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक इसे कल 28 फरवरी की सुबह 10:24 पर लांच किया जाएगा। उल्टी गिनती सुबह आठ बजकर 54 मिनट पर शुरू हो गई, हालांकि, इस दौरान मौसम की भूमिका सबसे अहम होगी। लॉन्चिंग मौसम की तत्कालीन परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

सैटेलाइट क्या करेगा ?

Amazonia-1 सैटेलाइट ब्राजील का पहला ऑप्टिकल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। ये अमेजन के जंगलों में कम हो रहे पेड़ों और अन्य बदलावों पर नजर रखने के हिसाब से डिजाइन किया गया है।


नई पीढ़ी के छोटे रॉकेट को पहली उड़ान पर भेजने की तैयारी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन नई पीढ़ी के छोटे रॉकेट का जल्द ही इस्तेमाल भी शुरू करेगा, लेकिन इससे पहले संगठन इन्हें कक्षीय प्रायोगिक उड़ान पर भेजने की तैयारी कर रहा है। संगठन ने छोटे उपग्रहों के नए वैश्विक प्रक्षेपण बाजार को देखते हुए छोटे लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) को बनाना शुरू किया।

सूत्रों ने कहा है कि एसएसएलवी-डी1 को मार्च के अंत में या अप्रैल के शुरू में प्रक्षेपित किया जा सकता है। अंतरिक्ष विभाग के सचिव और इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि एसएसएलवी छोटे उपग्रहों की बढ़ती मांग को देखते हुए विकसित किया गया है। उन्होंने पूर्व में कहा था कि एसएसएलवी के कलपुर्जो को महज 72 घंटे में जोड़ा जा सकता है। इसरो की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष जी. नारायण ने कहा कि विश्व में छोटे प्रक्षेपण यानों की मांग में वृद्धि हुई है। इसीलिए, इस पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें