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कोरोना से बचाने के लिए चार मासूमों को झोपड़ी में किया बंद, आग लगने से जिंदा जले, दर्दनाक मौत

जानकारी के अनुसार, पासवान बिरादरी का एक परिवार पटना के समीप स्थित अलाउद्दीनचक गांव में एक झोपड़ीनुमा मकान में रहता था. घर पर तीन बेटे और एक बेटी थी. बेटी की आयु 12 वर्ष और बेटों की आयु पांच से आठ वर्ष के बीच थी.
  • Bhupendra Singh Chauhan

  • Published:28-04-2021 15:29:17
  • राज्य

कहते हैं कि, कभी-कभी कुछ अच्छा करने के चक्कर में इतना ख़राब हो जाता है कि, वह आजीवन पश्चाताप में बदल जाता है. ऐसा ही दिल दहला देना वाला मामला बिहार की राजधानी पटना के समीप स्थित एक गांव से आया है. जहां चार मासूम बच्चों की जिंदा जलकर मौत हो गई. घटना के बाद पूरे क्षेत्र में मातम छा गया. माता-पिता का रो-रो कर बुरा हाल है. लोग उन्हें ढांढस बंधाते रहे.



जानकारी के अनुसार, पासवान बिरादरी का एक परिवार पटना के समीप स्थित अलाउद्दीनचक गांव में एक झोपड़ीनुमा मकान में रहता था. घर पर तीन बेटे और एक बेटी थी. बेटी की आयु 12 वर्ष और बेटों की आयु पांच से आठ वर्ष के बीच थी. कोरोना वायरस गांव तक दस्तक दे चुका है. वहां कई लोग संक्रमित हैं.  इसलिए कोरोना से अपने बच्चों को बचाने के लिए माता-पिता उन्हें झोपड़ीनुमा मकान में बंद करके कहीं चले गए और कुछ देर बाद ही झोपड़ी में आग लग गई.



आग की लपटों को देखकर गांव के लोग बच्चों को बचाने की कोशिश करते या आग बुझाने का प्रयास करते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. चारों बच्चे झोपड़ी के अंदर झुलसकर दम तोड़ चुके थे. उनका चेहरा पहचानने में नहीं आ रहा था. सूचना मिलने के बाद पुनपुन थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और चारों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.



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