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ऑक्सीजन की किल्लत पर केंद्र को हाईकोर्ट की फटकार, कहा- आप अंधे हो सकते हैं लेकिन हम नहीं

कोरोना: देशभर में कोरोना की दूसरी लहार तबाही मचा रखी है। घर से बाहर निकलते ही अस्पतालों से लेकर श्मशान घाटों तक के दृश्य आपके हृदय को बुरी तरह आहत कर देने वाले हैं। इस समय कोई बेफिक्र नजर आ रहा है तो वह हैं जिम्मेदार।
  • Bhupendra Singh Chauhan

  • Published:04-05-2021 15:14:40
  • कोरोना

कोरोना: देशभर में कोरोना की दूसरी लहार तबाही मचा रखी है। घर से बाहर निकलते ही अस्पतालों से लेकर श्मशान घाटों तक के दृश्य आपके हृदय को बुरी तरह आहत कर देने वाले हैं। इस समय कोई बेफिक्र नजर आ रहा है तो वह हैं जिम्मेदार। 


ऐसे में कुमार विश्वास की एक कविता की लाइन यहां यथार्थ होते दिख रही है। जिसमें उन्होंने कहा था, 'जिनके हाथों में पतवारें सौंपी, वो ही भँवरों के सूदखोर निकले'। अर्थात हमने जिन्हें अपनी रक्षा, सुरक्षा, मदद के लिए चुना था वो ही आज जान के दुश्मन नजर आ रहे हैं।


इसका नतीजा आम जनता को चुकाना पड़ रहा है। बता दें कोरोना मरीजों और कोविड से होने वाली मौतों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी से दहशत का माहौल है। देश की स्वास्थ्य प्रणाली चरमरा गई। देश भर के अस्पतालों में बेड, वेंटिलेटर, रेमडेसिवीर और ऑक्सीजन की किल्लत जारी है। सैकड़ों लोग बिना इलाज के ही दम तोड़ रहे हैं। वहीं श्मशान घाटों पर शवों के अंतिम संस्कार के लिए कई घंटों का इंतजार करना पड़ रहा है। 


कोरोना महामारी के कहर के चलते राजधानी दिल्ली समेत देश भर में ऑक्सीजन की भारी किल्लत जारी है। इसी कड़ी में ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि, आप अंधे हो सकते हैं, लेकिन हम नहीं। 


गौरतलब है कि, कोरोना के इसके खतरनाक रूप के बावजूद देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव और यूपी पंचायत चुनाव जारी रहा। जिसमें एकत्र होने वाली भीड़ के माध्यम से कोरोना संक्रमण की चेन को बढ़ने में और मदद मिली। यूपी में स्थिति यह है कि, कोरोना संक्रमण अब शहरों के बाद गांवों में बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। 


सबसे प्रमुख बात यह है कि, गांवों में न तो जांच हो रही न तो दवाएं उपलब्ध हैं। जिसके चलते लोग इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। गांव की स्थिति काफी भयावह बनती नजर आ रही है। श्मशान घाटों पर लगी लंबी लंबी कतारों के बाद भी जिम्मेदारों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।



 
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