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कानपुर: कालाबाजारी में जुटे सांसों के सौदागर, एक-एक सांस की जद्दोजहद

कानपुर: उत्तर प्रदेश में कोरोना की स्थिति बेकाबू है। यहां अस्पतालों में बेड, स्टोरों में दवाइयां, सांस लेने के ऑक्सीजन और यहां तक की अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाटों तक सिर्फ किल्लत और कतारें ही हैं। इसके बावजूद सांसों के सौदागर कालाबाजारी करने से बाज नहीं आ रहे है।
  • Bhupendra Singh Chauhan

  • Published:06-05-2021 16:07:57
  • उत्तर प्रदेश

कानपुर: उत्तर प्रदेश में कोरोना की स्थिति बेकाबू है। यहां अस्पतालों में बेड, स्टोरों में दवाइयां, सांस लेने के ऑक्सीजन और यहां तक की अंतिम संस्कार करने के लिए श्मशान घाटों तक सिर्फ किल्लत और कतारें ही हैं। इसके बावजूद सांसों के सौदागर कालाबाजारी करने से बाज नहीं आ रहे है।  ताजा मामला कानपुर महानगर का है। जहां निजी अस्पतालों और अवैध नर्सिंग होमों में सांसों की कालाबाजारी धड़ल्ले से की जा रही है।



बिना किसी सुविधाओं के महज एक-एक, दो-दो कमरों में चलने वाले नर्सिंग होमों में सिर्फ ऑक्सीजन के नाम पर मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। यहां तक कि भर्ती किए जाने वाले मरीजों की जांच तक नहीं कराई जाती है। मरीजों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें हैलट और उर्सला जैसे अस्पतालों में भेज दिया जाता है। जहां बहुत से मरीज कोविड- पॉजिटिव पाए जाते हैं।



आपको बताते चलें कि, इन नर्सिंग होमों में भर्ती किए जाने वाले मरीजों से इलाज के लिए 50-50 रुपए वसूले जा रहे हैं और इलाज के नाम पर सिर्फ ऑक्सीजन दी जा रही है। बता दें कि, सीएमओ ने शहर में 150 अवैध नर्सिंग होमों को चिन्हित किया है। सीएमओ कार्यालय 75 से अधिक नर्सिंग होम्स का पंजीकरण मानक पूरे न होने की वजह से ऑनलाइन निरस्त कर चुका है।         



होम आइसोलेशन के मरीजों को सिलेंडर मिलने में काफी दिक्कते हो रही हैं। इसके साथ ही कोविड अस्पताल पूरे भरे हुए हैं। जिसका ये नर्सिंग होम फायदा उठा रहे हैं। ऑक्सीजन की किल्लत के चलते पीड़ित अवैध नर्सिंग होम्स के चंगुल में फंस जा रहे हैं। नर्सिंग होम वाले सिर्फ ऑक्सीजन देने के लिए भर्ती करते हैं। यह नहीं देखा जाता कि रोगी कोरोना पॉजिटिव है या निगेटिव। जब रोगी का ऑक्सीजन लेवल 40-50 आ जाता है तो उसे हैलट और उर्सला भेज देते हैं।


 
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